उस एहसास को मैं क्या नाम दूँ ??
जिसके बारे मे, मैं खुद नहीं जानता ...
नए सपने जो आँखे बन्द करने पे भी पूरे नहीं हो रहे,
कैसे उन सपनो को पूरा करूँ, मैं ये नहीं जानता???????
हर दिन ये सोच कर मैं उठता हूँ ,
की आज उस एहसास को ख़तम करूंगा...
हर करवट के साथ मैं ये सोचता हूँ,
की आज वो अधूरा सपना पूरा ज़रूर देखूंगा..
आँखे बन्द करने से भी डर लगता है …
उस एहसास को दिल समझना ही नहीं चाहता,
क्यूँकी उस एहसास से ही अब दम घुटता है ......

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