Sunday, October 23, 2011

काश तुम समझ पाते

अगर तुम मेरे साथ कदम से कदम मिलाते,
तो समझ पाते की मैं किधर जाना चाहती हूँ.

अगर तुम मेरी नज़रों को पढ़ पाते,
तो जान पाते की मैं कैसे सपने देखती हूँ.

अगर तुम मेरा हाथ थाम, मुझसे कुछ देर बातें कर पाते,
तो जान पाते की मैं तुमसे कितनी बातें करना चाहती हूँ.

बस यूँही राह में थोड़ी दूर तक, बस अपना साथ ही देते, 
तो समझ पाते की मैं तुम्हारे लिए क्या सोचती हूँ .....     

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