Friday, September 30, 2011

नेहा

इतने सपने संजोये घर से चल तो दिए थे हम,
पर पता नहीं था कि आगे खुशी है या गम.
डर था मन मे बहुत,
क्योंकि यहाँ सब थे पराए.

दो दिन कमरे मे अकेले बिताने के बाद,
लगा क्या आएगा सवेरा इस रात के बाद??

एक सुबह की किरण के साथ, तुम आई देने मेरा साथ.
एक पल मे ही तुमने मेरे चेहरे पर मुस्कान ला दी,
एक पल मे तुमने मेरी  ज़िन्दगी लौटा दी.

न दोस्त मिले न दुश्मन, न दोस्ती मिली न सहारा,
जब तक साथ न था तुम्हारा.

तुम्हारा वो जन्मदिन मनाना,
तेज़ बारिश मे मेरे लिए छाता लाना.

रात रात भर मस्ती करना,
और सुबह वार्डेन से डाँट खाना.

मेस का खाना देख कर तीतोस भाग जाना.
और वहा पर खूब गप्पे लड़ाना,

एक्साम के समय दिन भर सोते रहना.
और रात को किताबों मे आँखें गढ़ाना

मेरे सुबह के अलार्म से तुम्हारा गुस्सा होना,
और मेरा तुम्हे चाँकलेट और वडा पाव दे कर मनाना.

मेरे हाथों से बनाए खराब खाने को भी प्यार से खाना .
और मेरी छोटी छोटी गलतिओं पर प्यार से समझना ,

जब जब हम थे अकेले,
तुम साथ थे मेरे  ..:)

ऐसे न जाने कितने खट्टे पल और मीठे पल,
जो जिए हमने साथ- साथ,
याद आते है हमेशा जो तुम न हो पास ...:)

miss you a lot neha ..

4 comments:

  1. "You see the pain that lies in the eyes
    But, alas, the eyes are dry,
    They won't cry
    No, They won't cry."

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  2. this is the 1st poem somebody ever wrote for me... love u soooooooooo much akansha...!!!! i feel sooooooo lucky to have a naughty room partner like u...!!!
    akansha gupta - puri paagal...!!! :P :P
    neha sahni- thori paagal...!!!!!!! :P

    love u dear... n missing u a lot...!!! :)

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